एक और 'राम' के लिए स्वयंवर
एक और 'राम'
के लिए स्वयंवर
नीरज
दुर्ग,
छत्तीसगढ़
यह पुराना किस्सा है कि राजा जनक ने प्रण किया
था, जो शिव-धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा उसी से सीता का विवाह होगा. इसके लिए
परंपरानुसार स्वयंवर का आयोजन किया गया और सीता के साथ राम का विवाह संपन्न हुआ.
अब छत्तीसगढ़ की अन्नपूर्णा स्वयंवर रचाने जा रही है. यहां धनुष पर प्रत्यंचा
चढ़ाने की शर्त तो नहीं है लेकिन अन्नपूर्णा ने तय किया है कि जो युवक उसके पांच
सवालों का जवाब देगा, वह उसी से ब्याह करेगी.
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आदिवासी युवती अन्नपूर्णा के
स्वयंवर के लिए 8 जुलाई की तारीख़ तय की गई है. |
दुर्ग के घुमका गांव के रामरतन ठाकुर के घर में इन दिनों उत्सव-सा माहौल है. इस
आदिवासी परिवार ने अपनी बेटी के लिए योग्य वर की तलाश के लिए स्वयंवर का आयोजन करना
तय किया है.
स्वयंवर का आयोजन होगा 8 जुलाई को लेकिन उससे पहले यानी 3 जुलाई तक इच्छुक वर को
अन्नपूर्णा के परिजनों से संपर्क करना होगा.
4 जुलाई से रामचरित मानस यज्ञ का आयोजन होगा और यज्ञ की समाप्ति के बाद स्वयंवर
आयोजित होगा. हालांकि विवाह की तारीख तय नहीं की गई है.
इस स्वयंवर की ‘सीता’ यानी अन्नूर्णा के पिता राम रतन ठाकुर कहते हैं- “ हम अपनी
बेटी के लिए योग्य वर चाहते हैं और यह भी चाहते हैं कि पुरानी परम्परा भी कायम रहे.
इसलिए हमने इस स्वयंवर का आयोजन किया है.”
इस आयोजन की सूचना के लिए आसपास के इलाके में हैंडबिल बांटे जा रहे हैं, दीवारों पर
पम्पलेट चिपकाए जा रहे हैं. लेकिन आदिवासी समाज से जुड़े लोगों को शक़ है कि
स्वयंवर में युवकों की भागीदारी हो पाएगी.
असल में स्वयंवर की शर्तें ही कुछ ऐसी हैं.
22 साल की अन्नपूर्णा के स्वयंवर के लिए पहली शर्त तो यही है कि युवक आदिवासी हल्बा
समाज का हो और उसकी उम्र 22 से 26 वर्ष के बीच हो. इसके अलावा इस इलाके के धमतरी,
लोहारा, गुरुर, बालोद और गुंडरदेही तहसील के युवक ही इस स्वयंवर में भाग ले पाएंगे.
इसके अलावा पांच सवालों का जवाब देना तो अनिवार्य होगा ही. ये और बात है कि ये पांच
सवाल क्या-क्या होंगे, इसका राज स्वयंवर वाले दिन ही खुलेगा.
बालोद के राजकुमार कहते हैं- “ इतनी शर्तों के बाद तो वर मिलना मुश्किल है और वर
मिल भी जाए तो अन्नपूर्णा के पांच सवालों का जवाब देना तो मुश्किल ही होगा. जाने
कौन से सवाल हों ! ”
हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता जुलेखा जबीं इस पूरे आयोजन को महिलाओं के सम्मान से
जोड़ कर देखती हैं. जुलेखा कहती हैं- “ इसे आप बेहद सामान्य घटना मान सकते हैं
लेकिन जिस भारतीय परम्परा में महिलाएं केवल शर्तें मानने को बाध्य रही हों, वहां
किसी महिला का शर्त रखना क्या सुखद नहीं है ? ”
यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्नपूर्णा को अपनी शर्तों पर कोई ‘राम ’ मिलता है या
नहीं और जाहिर है, इस पर पूरे इलाके की नज़र टिकी हुई है.
24.06.2008, 04.42 (GMT+05:30) पर प्रकाशित