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Newsvine
राम को गार्ड ऑफ आनर

भगवान नहीं, राजा राम

सुनील कुमार गुप्ता

भोपाल से
 

 

 

रामसेतु विवाद के पहले और बाद में ऐसे कई अवसर आए हैं, जब राम के अस्तित्व को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. लेकिन मध्य प्रदेश के ओरछा में इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं है.

 

ओरछा का राज न सिर्फ राम के नाम पर चलता है, बल्कि मंदिर में विराजे राम सरकारी गार्ड आफ ऑनर के साथ ही जागते-सोते हैं.

 राजा के तौर पर राम की मान्यता

ओरछा और अयोध्या ऐसी दो जगहे हैं, जहां राम को भगवान के साथ-साथ राजा के रुप में मान्यता मिली हुई है.

 

'दिवस ओरछा रहत हैं, रेन अयोध्या बास'. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अयोध्या में जन्में राम देश-दुनिया में भले ही भगवान के रूप में पूजे जाते हैं, लेकिन ओरछा में रियासत काल से ही राम को 'भगवान' के साथ-साथ 'राजा' माना गया है. यही कारण है कि आजादी के बाद से सरकार के सेनानी रोज इन्हें राजा के रूप में चार बार सलामी देते हैं. गार्ड ऑफ ऑनर की व्यवस्था सरकार ने की है.

 

यह मिथक है कि ओरछा रियासत काल में रानी कुंवरगनेश अयोध्या से भगवान राम को पुत्र की भांति ओरछा लाई थीं. यहां उन्होंने राम को पुत्रवत मान राजतिलक कराया और फिर तभी से मंदिर में विराजे राम भगवान के साथ-साथ राजा के रूप में स्वीकार किए गए.

 

देश और दुनिया में अकेले ओरछा ही ऐसा मंदिर है, जहां भगवान राम राजा के रूप में मान्य हैं. सरकार ने भी 'भगवान' को 'राजा' माना है. राजा की सुरक्षा और सम्मान में सरकार ने यहां मंदिर में सेनानी तैनात किए हैं. मंदिर के मुख्य द्वार पर पहरेदार के रूप में सेनानी 24 घंटे में चार बार सलामी देता है.

 

गार्ड ऑफ ऑनर यानी सलामी का वक्त सुबह 8 बजे, दोपहर 12.30 बजे, रात 8 बजे और देर रात 1.00 बजे नियत है. इन चारों वक्त मंदिर में आरती होती है.

 

मंदिर के पुजारी रमाकांत शरण बताते हैं कि यहां अयोध्या के भगवान राम राजा के रूप में विराजित हैं. वे कहते हैं- "ओरछा में आज भी राम राजा की ही सरकार चलती है."

 

यह भी कम दिलचस्प नहीं है कि ओरछा नगरी की सीमा में किसी भी नेता अथवा अधिकारी को सलामी नहीं दी जाती और न ही कोई यहां अपने वाहन पर लगी बत्ती को जलाकर आता है. जून 1984 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ओरछा आईं तो यह सुन कर हतप्रभ रह गईं कि यहां राम को राजा के रुप में मान्यता मिली हुई है, इसलिए यहां राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को सलामी नहीं दी जाती.

 

04.05.2008, 00.18 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

nisha(nishakrishne@rediffmail.com)

 
 bahut khoob,aisa agar saare desh mein laagoo ho jaye to saare fasad hi khatam ho jayen.igo clash nahi hoga to jhagada bhi nahi hoga. 
   
 

राजेश अग्रवाल (agrrajesh@gmail.com)

 
 रविवार डाट काम का ताजा अंक देखकर बड़ी प्रसन्नता हो रही है. भरपूर पठनीय सामग्री व बेहतरीन सजावट के लिए आपकी पूरी टीम को बधाई.  
   
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