मुशर्रफ ठीक कर रहे हैं-बेनज़ीर
मुशर्रफ ठीक कर रहे हैं-बेनज़ीर
अल्ताफ हुसैन
कराची से
तो अब बेनज़ीर भुट्टो की बारी है.
18 को उनके पाकिस्तान लौटने की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारे में कयासों का एक दौर
जैसा चल पड़ा है. हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को बड़े बेआबरु होकर तेरे
कूचे से हम निकले वाले अंदाज में जिस तरह पाकिस्तान से बाहर का रास्ता दिखाया गया,
वैसा कुछ बेनज़ीर के साथ नहीं होगा, यह तय है. लेकिन इस बात की गारंटी तो बेनज़ीर
भी नहीं लेतीं कि उनके साथ सब कुछ अच्छा-अच्छा ही होगा. जनरल परवेज़ मुशर्रफ, चुनाव,
कट्टरपंथियों के विस्तार के अलावा उनके सामने भारत के साथ संबंधों के मुद्दे पर
कई-कई सवाल हैं, जिनका जवाब तलाशना उनके लिए आसान नहीं है. क्या सोचती हैं बेनज़ीर,
उनकी ही जुबानी-
जनरल परवेज़ मुशर्रफ
जनरल मुर्शरफ ने मुझे आश्वस्त किया है कि संसद के पास सभी अधिकार हैं और उन्हें
अपने लिए सत्ता नहीं चाहिए. लेकिन जब वे कहते हैं कि संसद के साथ होने के लिए
उन्हें सभी अधिकार चाहिए, तो इससे यही लगती है कि वे राष्ट्रपति के बतौर उन
अधिकारों की लगाम अपने हाथ में रखना चाहते हैं, जिनके द्वारा वे जब चाहें संसद
को भंग कर दें. हमारी बातचीत के केंद्र में अब भी यही मुद्दा है.
एक बात बहुत साफ है कि हम पीपीपी के लिए यह संभव नहीं है कि वह जनरल मुशर्रफ के
मामले में पूर्णतः स्वीकार या पूर्णतः अस्वीकार की नीति अख्तियार करे. उनकी कई
नीतियों की हम आलोचना भी करते हैं और जहां उन्होंने सही किया है, हम उनका समर्थन भी
करते हैं.
लोकतंत्र
जनरल मुशर्रफ का दावा है कि वे एक लोकतांत्रिक ढ़ांचा का निर्माण करना चाहते हैं.
हम दोनों की राय है कि देश में चुनाव के लिए सुधारवादी कार्यों का क्रियान्वयन होना
चाहिए. हालांकि कई मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई है. खास तौर पर
लोकतांत्रिक मुद्दों को लेकर हमारे बीच कुछ असहमतियां हैं.
कुछ लोग तो यहां तक मानते हैं कि जनरल मुशर्रफ ने देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को
पूरी तरह ठप्प कर आपातकाल लागू करने की नियत से लाल मस्ज़िद का विवाद खड़ा किया.
हालांकि उन्होंने कट्टरपंथियों के खिलाफ जिस तरह कड़ी कार्रवाई की है, उससे लगता है
कि वे असल में लोकतंत्र के पक्ष में हैं.
जनरल मुशर्रफ ने जो चार्टर हमें दिया है, उससे लगता है कि वे पाकिस्तान में
लोकतंत्र को लेकर वाकई गंभीर हैं.
कट्टरपंथी
अलकायदा समेत कई संगठनों के बड़े कट्टरपंथियों की पाकिस्तान में गिरफ्तारी के बाद
यह स्पष्ट हो गया है कि देश में इनकी जड़ें पिछले कुछ सालों में बहुत मजबूत हुई
हैं. इन संगठनों ने देश और देश से बाहर पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाने का काम किया
है. कल तक जो कट्टरपंथी केवल कबीले वाले इलाके में थे, वे लाल मस्जिद तक पहुंच चुके
हैं.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी देश में शांति के लिए प्रतिबद्ध है और मुझे उम्मीद है कि
मुशर्रफ़ इन कट्टरपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शांति में आस्था रखने वाले
नरमपंथियों को एकजुट करने की हमारी कोशिशों का समर्थन करेंगे.
भारत के साथ संबंध
अधिकांश मामलों में जनरल मुशर्रफ ने भारते के साथ जो रुख अपनाया है, वह सही है.
आप गौर करेंगे कि इस्लामाबाद में हमने राजीव गांधी के साथ शांति के मुद्दे पर
जो निर्णय लिए थे या मेरे पिता ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ जो समझौता
किया था, मुशर्रफ़ कहीं न कहीं उसी भावना के साथ काम कर रहे हैं.
यह बात हम दोनों को समझने की जरुरत है कि युद्ध हमारे लिए कभी भी फायदेमंद नहीं हो
सकता है. लाखों की संख्या में एक-दूसरे के खिलाफ सैनिक उतारना कोई बुद्धिमानी नहीं
है. भारत के साथ कुछ मामलों में जनरल मुशर्रफ का रुख निंदा योग्य है और हमने उनका
आलोचना भी की है. लेकिन इतना तय है कि हमें शांति के लिए एकजुट होकर पहल करने की
जरुरत है.
कश्मीर
कश्मीर का मामला पाकिस्तान और भारत के लिए एक ऐसा मुद्दा है, जिसे लगातार उलझाने की
कोशिश हुई है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसके लिए युद्ध का रास्ता अख्तियार
कर लें. आखिर भारत और चीन के बीच भी इस तरह के विवाद हैं लेकिन उनके बीच तो लंबे
समय से इस तरह की स्थितियां पैदा नहीं हुई हैं.
09.09.2007, 00.35 (GMT+05:30) पर प्रकाशित