वेणुगोपाल बने रहेंगे
वेणुगोपाल बने रहेंगे-
सर्वोच्च न्यायालय
नई दिल्ली. 8 मई 2008
उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा कानून बना कर एम्स के निदेशक पी वेणुगोपाल
को हटाए जाने के निर्णय को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि स्वायत्त संस्थानों के काम
में सरकार को इस तरह हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.
न्यायाधीश तरूण चटर्जी और एच. एस. बेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए
वेणुगोपाल को कार्यकाल पूरा होने तक पद पर कार्य करते रहने का निर्देश भी जारी किया.
अदालत के इस फैसले के बाद विपक्षी दल भाजपा समेत कई राजनीतिक दलों ने स्वास्थ्य
मंत्री अंबुमणी रामदास से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि नैतिकता के आधार पर
रामदास को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. जबकि रामदास ने इस तरह की
मांग को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि उनके इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता.
पिछले साल 30 नवंबर को सरकार ने क़ानून में संशोधन करके पी वेणुगोपाल को एम्स के
निदेशक के पद से हटा दिया था. सरकार ने नए कानून में 65 साल की उम्रसीमा या 5 साल
के कार्यकाल को आधार बना कर 66 वर्ष के वेणुगोपाल को उनके पद से हटा दिया था. उनके
स्थान पर सरकार ने टीडी डोगरा को एम्स का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया था.
सरकार के इस फैसले के बाद वेणुगोपाल ने अदालत की शरण ली. अदालत के निर्णय के अनुसार
वेणुगोपाल इस साल 3 जुलाई तक अपना कार्यकाल खत्म होने तक पद पर बने रहेंगे.
इधर विपक्षी दल भाजपा ने आज अदालत का फैसला आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे
की मांग की. भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने अपने
स्वार्थ के लिए नया कानून बनाया था, जिसे उच्चतम न्यायालय ने ठुकरा दिया.
भाजपा की ही सुषमा स्वराज
ने नैतिक आधार पर रामदास से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अदालत का फैसला आने के
बाद उन्हें एक दिन भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है.
भाजपा नेताओं के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रामदास ने कहा कि कानून बनाने
का काम संसद ने किया है. ऐसी हालत में उनके इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता.