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 पहला पन्ना
 

 
 बहस : बात पते की 
गणतंत्र की संविधान कथा
कुछ लोग भारत को ऐसा गणराज्य बनाते रहे, जिसमें लोक, तंत्र, गण और राज्य चारों वर्णाश्रम व्यवस्था की तरह फलते फूलते रहें. लोग ब्राह्मणों की तरह असंतोष का प्रवचन करते रहें. तंत्र आईएएस नौकरशाह बनकर शोषक क्षत्रिय धर्म का पालन करता रहे. राजनेता गण बने हुए वैश्यों की तरह धन का संग्रह करते रहें और राज्य शूद्रों की तरह केवल अभिव्यक्ति का बहुमत बना रहे.
गांधीवादी चिंतक कनक तिवारी का विश्लेषण
 
 मिसाल बेमिसाल : समाज 
उम्मीदों वाली साईकल
भारतीय प्रबंधन संस्थान, कोलकाता के मिश्किन इंगेवले और उनके साथियों ने मिल कर जिस कोपनहेगन व्हील का निर्माण किया है, उसका अनावरण यूरोपीय सड़कों पर तो हो गया पर भारत की सड़कों पर इसकी परीक्षा अभी होनी है. कोपनहेगन व्हील में साईकल की मूल सरलता को बरकरार रखते हुए, उसे आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है, जिसमें सुविधानुसार कई तरह के विकल्पों को चुना जा सकता है.
कोपनहेगन से लौटकर बिजू नेगी की रिपोर्ट
     
 मुद्दा : उ.प्र. 
हरमिंदर राज सिंह की मौत पर उठे सवाल
लखनऊ में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हरमिंदर राज सिंह की कथित आत्महत्या पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं. हरमिंदर की मौत पर लगातार परदा डालने की कोशिश हो रही है. लखनऊ से संदीप पांडेय की रिपोर्ट
 
 मुद्दा : असम 
कमजोर पड़ता उल्फा
आज की तारीख में उल्फा के अधिकांश शीर्ष नेताओं ने सरकार के सामने समर्पण कर दिया है. ऐसे में फिर से यह सवाल उठने लगा है कि क्या इन समर्पणों के पीछे के सच को स्वीकार करने का नैतिक साहस उल्फा में है? गुवाहाटी से नवा ठाकुरिया की रिपोर्ट
     
 मुद्दा : समाज 
जानलेवा महंगाई
खाद्य पर्दार्थों की कीमतों ने सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं. खाने की चीजों के दाम में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है और परिणाम यह है कि आम उपभोक्ता अपनी खाली जेबें बाहर निकाले हताश-निराश खड़ा है. खाद्य एवं कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा का विश्लेषण
 
 मुद्दा : बिहार 
सूचना का आचार
सूचना का अधिकार कानून या आरटीआई को स्वतंत्र भारत में एक क्रांतिकारी वदलाव के तौर पर देखा गया था लेकिन लगता है कि सरकार किसी भी तरह से इससे मुक्ति चाहती है. पटना से कुमार कृष्णन की रिपोर्ट
 
     
 

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राम पुनियानी

 
 
शिवसेना के बाउंसर


 


 

संदीप पांडेय

 
 
निशाने पर आदिवासी




 
         
 हिंद स्वराज : सौ साल 
गांधी दर्शन का मौलिक सूत्र
हिन्द स्वराज गांधीजी के जीवन दर्शन का मौलिक सूत्र है और अन्तिम समय तक गांधीजी उसे ऐसा ही मानते रहे. वे देख रहे थे कि इन दिनों मानव सभ्यता एक आंतरिक क्रूरता की दिशा में बढ़ रही है और उसकी आंतरिक कोमलता की कुर्बानी देकर तथाकथित सभ्यता का ठाठ रचा जा रहा है. इसलिए गांधीजी ने यह बार-बार कहा कि-मानव परिवार को आंतरिक कोमलता का बलिदान नहीं करना चाहिए.
रामेश्वर मिश्र पंकज के विचार
 
 हिंद स्वराज : सौ साल 
दस्तक देता दस्तावेज
गांधीजी ने स्वयं ही कहा है कि उनके विचार उनके अपने हैं भी और नहीं भी. यह तो सही बात है कि विचार के क्षेत्र में विचार से ज्यादा वैचारिक दृष्टि का महत्व होता है. कहीं यह नहीं लगता कि गांधीजी ने केवल विरोध के लिए विरोध किया हो, न तर्क के लिए तर्क. आज हमें गांधीजी के संदर्भ में प्रचलित सफलता या असफलता जैसी कसौटी और परिभाषा को भी छोड़ना होगा.
नरेश मेहता के विचार
 
 हिंद स्वराज : सौ साल 
हिन्द स्वराजः कार्य योजना और नैतिक चेतना
यह एक विचित्र बात है कि संविधान सभा में गांधी जी का उल्लेख नहीं था. न ही उन्होंने किसी प्रकार का उसमें भाग लिया, जिस तरह की संवैधानिकता पर वर्तमान भारतीय व्यवस्था टिकी हुई है. प्रश्न उठता है कि ऐसी स्थिति में गांधीजी के विचारों का क्या संकलन हो सकता है? यह अपेक्षा कि एक कार्य योजना प्रस्तुत की जानी चाहिए, वास्तव में नितांत आधुनिक अवधारणा है.
गोविन्दचंद्र पांडे के विचार
         
 मिसाल बेमिसाल : समाज 
जान बचाने वाली ये औरतें
हमारे पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं को कमजोर समझा जाता है. लेकिन भारत में होने वाले सांप्रदायिक दंगों में महिलाओं ने जिस बहादुरी के साथ दंगाइयों का मुकाबला किया है, लोगों की जान बचाई है, वह अचरज में डालने वाला है. कमजोर मानी जाने वाली महिलाओं ने ऐसे-ऐसे हालात में हिम्मत दिखाई है, जब बहादुर कहे जाने वाला पुरुष वर्ग दुम दबा कर निकल भागा था.
डॉ. असगर अली इंजीनियर का विश्लेषण
 
 मुद्दा : बात पते की 
विदेशियों को मताधिकार क्यों
अप्रवासी का वास्तविक अर्थ अल्प प्रवासी है. जो लोग विदेशी नागरिकता ले चुके हैं, वे भारतीय मूल के तो हैं, पर भारतीय नहीं हैं. जब वैश्विक मंदी का दौर शुरू हुआ तब इन अप्रवासी भारतीयों ने यहां के अपने कारखानों में लगी अंश पूंजी को निकालना आरंभ किया, उसके कारण भारत से बड़ी पूंजी बाहर चली गई थी. ऐसे में इन विदेशियों को वोट का अधिकार क्यों देना चाहिए ?
समाजवादी नेता रघु ठाकुर का विश्लेषण
 
 बहस : कृषि 
जानलेवा जीएम फसल
गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में बीटी बैगन की अवैध खेती जोरो पर हो रही है. ये जीएम फसलें मानव स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं. आज की तारीख में इन फसलों के कारण खेतों में भारी खरपतवार फैलने की आशंका है, जिसे किसी भी तरह खत्म नहीं किया जा सकता. जार्जिया में एक लाख से अधिक एकड़ जमीन एक खतरनाक खरपतवार से बंजर हो गई है.
कृषि एवं खाद्य विशेषज्ञ देविंदर शर्मा का विश्लेषण
             
 बहस : बात पते की 
वीएन राय के नाम पत्र
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय पिछले कुछ महीनों से लगातार विवादों के घेरे में है. विश्वविद्यालय के कुलपति विभूतिनारायण राय के नाम सुभाष गाताडे का खुला पत्र.
 
 मुद्दा : बात पते की 
नोबेल की नाकाम अदा
नोबेल समिति को चाहिए कि वह संन्यास ले ले और अपनी अकूत सम्पदा को ऐसे किसी अन्तर्राष्ट्रीय शांति संगठन को को दे दे, जो स्टारडम और रेटरिक से अभिभूत न होती हो. इतिहासकार हॉवर्ड ज़िन की टिप्पणी.
 
 मुद्दा : बात पते की 
अब हलफ़नामा दर्ज करना ज़रूरी
प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान के कार्यक्रम में प्रगतिशील लेखकों के शामिल होने को लेकर खड़े हुये विवाद पर छत्तीसगढ़ के डीजीपी व संस्थान के संयोजक विश्वरंजन की टिप्पणी.
 
 बहस : बात पते की 
क्या यह सब सलवा जुड़ूम है ?
रायपुर में प्रमोद वर्मा की स्मृति में हुए आयोजन पर प्रगतिशील-जनवादी लेखकों के खेमे में लगातार बहस चल रही है. प्रलेस से संबद्ध खगेंद्र ठाकुर की टिप्पणी
             
 

लाल्टू

लोग ही चुनेंगे रंग

रणेन्द्र

ग्लोबल गांव के देवता

मानुष

हकु शाह. वार्तालेख-पीयूष दईया

नंदीग्राम डायरी

पुष्पराज

मैत्री

तेजी ग्रोवर

 
 

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