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 पहला पन्ना
 

 
 बात निकलेगी तो... : छत्तीसगढ़ 
आदिवासी लड़कियों के साथ रोज एक शाइनी
छत्तीसगढ़ की नाबालिग लड़कियों को महानगरों में घरेलू नौकरानी का काम देने का झांसा देकर उन्हें अंधेरी कोठरी में ढ़केल देने का खेल सालों से चल रहा है लेकिन शाइनी आहूजा प्रकरण से यह सवाल फिर खड़ा हो गया है. अगर जशपुर, सरगुजा और कोरबा के गांवों में आप जाएं तो इन इलाकों से गायब आदिवासी लड़कियों के साथ हर रोज़ एक शाइनी आहूजा के किस्से मिल जाएंगे.
रायपुर से राजेश अग्रवाल की रिपोर्ट
 
 मुद्दा : महाराष्ट्र 
मुंबई मेट्रो क्या करेगा ?
मुंबई में मेट्रो रेल की शिलान्यास के तीन साल हो गए लेकिन आज भी कई सवाल जस के तस है कि आखिर मेट्रो से किन ताकतों का कैसा हित जुड़ा है ? इस मेट्रो रेल से तरक्की के मुकाबले कितनी तबाही होगी ? और ये भी कि मुंबई मेट्रो क्या करेगा ? हर सवाल के साथ कई-कई तरह की आशंकाएं और उलझनें जुड़ी हुई हैं, जिसने मेट्रो रेलवे को पूरी तरह से संदिग्ध बना दिया है.
मुंबई से शिरीष खरे की रिपोर्ट
     
 मुद्दा : बात पते की 
भूख का घर है भारत
विश्व के सर्वाधिक भूखे लोगों के घर भारत की दशा अफ्रीका के करीब 25 देशों से भी खराब है. भारत का कोई भी राज्य 'कम भूख' या 'सहनीय भूख श्रेणी' में भी नहीं आता. कृषि एवं खाद्य विशेषज्ञ देविंदर शर्मा का विश्लेषण
 
 कला : संस्मरण 
हबीब तनवीर होने का मतलब
हबीब तनवीर का काम और उसका महत्व, उसका इम्पलीकेशन, उसका अभिप्राय, सिर्फ रंगमंच तक ही सीमित नहीं है. उसकी और बहुत सारी अंतरध्वनियां दूसरी कलाओं में भी हैं.
सुप्रसिद्ध साहित्यकार अशोक वाजपेयी का वक्तव्य
     
 मुद्दा : उ.प्र. 
आ से आजमगढ़, आ से आईपीएल
आजमगढ़ को आतंकगढ़ कहा जा रहा है. लेकिन कुछ नौजवान एक ऐसी ईबारत लिख रहे हैं, जिस पर पूरा आजमगढ़ गर्व करता है. आजमगढ़ से राजीव यादव की रिपोर्ट
 
 मुद्दा : मध्यप्रदेश 
भूख के साथ जिंदा है मध्यप्रदेश
भारत के राज्यों में धन इफरात बढ़ रहा है, लेकिन भोजन की थाली खाली होती जा रही है. कम-से-कम अनाज की खपत की जो नई तस्वीर उभरकर आई है, वह मध्यप्रदेश में भयानक भुखमरी की ओर इशारा करती है. भोपाल से सचिन कुमार जैन की रिपोर्
 
     
 

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प्रीतीश नंदी

 
 
ब्लैकमेलिंग की दुनिया


 

संदीप पांडे

 
 
बदहाल नरेगा के मजदूर





 
         
 विचार : बात पते की 
फिर से हिन्द स्वराज
इस देश में ऐसा कोई व्यक्ति पैदा नहीं हुआ जिसने गांधी से ज्यादा शब्द बोले हों, अक्षर लिखे हों, सड़कें नापी हों, आन्दोलनों का नेतृत्व किया हो, बहुविध आयामों में महारत हासिल की हो और फिर लोक-जीवन में सुगंध, स्मृति या अहसास की तरह समा गये हों. 100 साल पहले गांधी ने लंदन से दक्षिण अफ्रीका लौटते हुए हिंद स्वराज लिखी थी, जो आज कहीं अधिक प्रासंगिक है.
गांधीवादी चिंतक कनक तिवारी का विश्लेषण
 
 बहस : बात पते की 
मीडिया पर धन बरसाने वाली सरकार
देश भर में सरकारों के कामकाज और राजनीतिज्ञों के आचरण एवं व्यवहार पर शिकायतें लगातार बढ़ी है, इसमें सरकारों ने अपनी छवि बनाने के लिए विज्ञापनों का रास्ता अपनाया. इससे सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ा है. चुनाव से पहले तो राज्य सरकारों ने बेतहाशा खर्च किए. अकेले दिल्ली की सरकार ने पिछले साल चुनावी वर्ष में विज्ञापनों पर साढ़े 22 करोड़ खर्च किए हैं.
पत्रकार अनिल चमड़िया का विश्लेषण
 
 बात निकलेगी तो... : बात पते की 
रेत पर हंगामा है क्यूं बरपा
भगवानदास मोरवाल के उपन्यास ‘रेत’ को लेकर उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया गया गया है. गिहार समुदाय ने मुकदमे से पहले इस उपन्यास को फांसी दी और उसे जलाया भी. इस समुदाय की महिलाओं ने पेड़ों पर फीते बांध कर लेखक के विद्या व धनविहीन होने की कामना की. विवाद का मुख्य कारण गिहार समुदाय की स्त्रियों द्वारा देह-व्यापार बताया जा रहा है.
उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल की टिप्पणी
         
 मुद्दा : बात पते की 
हिमालय की तबाही वाली परियोजनाएं
हिमालय की नदियों को आज भारत, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान की सरकारें दक्षिण एशिया के विद्युत उत्पादन केंद्रों में तब्दील करने पर तुली हुई हैं. इन उछलती-कूदती और तेज़ बहाव वाली नदियों पर कई पनबिजली परियोजनाएँ बन चुकी हैं और हज़ारों प्रस्तावित हैं. सबका ध्यान बिजली और उससे होने वाली आय पर है लेकिन इनसे होने वाली भयानक तबाही की सब अनदेखी कर रहे हैं.
आईआरएन से संबद्ध ऐन कैथरिन श्नायडर का विश्लेषण
 
 मिसाल बेमिसाल : झारखंड 
पढ़ने लगे बिरहोर
हालांकि देश में गहनी जैसे लाखों बच्चे हैं, जो उससे कम उम्र में ही फर्राटेदार अंग्रेजी-हिंदी पढ़ते औऱ बोलते हैं. लेकिन गहनी उन बच्चों से अलग है. गहनी एक बिरहोर परिवार की बच्ची है. बिहार और झारखंड में बिरहोर कहने का मतलब है जंगली समुदाय. गहनी के परिवार में भी इससे पहले की पीढ़ी में किसी ने कभी पढ़ने की नहीं सोची थी. लेकिन अब गहनी पढ़ रही है.
बगोदर, झारखंड से लौटकर संदीप कुमार की रिपोर्ट
 
 मुद्दा : हरियाणा 
बिक गई और बन गई पारो
वह देवदास की पारो नहीं थी. पारो बनना भी कहां चाहती थी. लेकिन जिस साल पारो और देवदास वाली फिल्म परदे पर धूम मचा रही थी, उसी साल नैंसी की आंखों में दूर देश के सुंदर सपने भर दिए गए. इससे पहले कि नैंसी इस सपने का सच जान पाती, उसे पारो बना दिया गया. हरियाणा के मेवात इलाके में लड़कियों को खरीद कर, बहला फुसला कर या जबरन इसी तरह पारो बनाया जाता है.
मेवात से लौटकर गीताश्री की रिपोर्ट
             
 साहित्य :  
अथः प्रेम कथा
जब क़िस्सा शुरु हुआ तो दोनों प्रेम में थे. मैं उसके प्रेम में और वह अपने आप से प्रेम में. मैंने कभी अपने आपसे प्रेम के बारे में सोचा नहीं था. उसने अपने अलावा किसी और से प्रेम के बारे में नहीं सोचा था. एक प्रेम की एकतरफा दास्तान गंधर्व की कलम से
 
 कला : संस्मरण 
अभिलाषा का इंद्रधनुष
मशहूर ब्राजीलियन नाटककार और रंगकर्मी ऑगस्टो बोआल कहते थे कि उनका एक ही सपना है- उम्र भर सपने देखना. और उन सपनों में दुनिया की एकजुटता. भारतभूषण तिवारी का आलेख
 
 साहित्य : कविता 
लाल्टू की कविताएं
सुप्रसिद्ध कवि लाल्टू की कविताओं में प्रेम और अंततः प्रेम के प्रसंग से विद्रोह को अलग से चिन्हित किया जा सकता है. लेकिन ये कविताएं अपने को वक्तव्य होने से अलग करती हैं और लगभग हर तरह के इकहरेपन से भी.
 
 साहित्य : कहानी 
अपना देश
सईद नफीसी की यह कहानी सरसरी तौर पर देखने में भले साधारण लगे, लेकिन कहानी का मर्म देश-काल-पात्र को बहुत गहराई से रेखांकित करता है.
             
 

कला बाज़ार

अभिज्ञात

मैत्री

तेजी ग्रोवर

दूर देखती आंखें

विश्व कविता से एक चयन

रंग अभी गीले हैं

मलयज के पत्र

एक बूँद का बादल

ध्रुव शुक्ल की कविताएं

 
 

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